Zindagi Bhar Kitna Bhi Dhan Dhan Kar Lo

पत्थर तब तक सलामत है, जब तक वो पर्वत से जुड़ा है। पत्ता तब तक सलामत है, जब तक वो पेड़ से जुड़ा है। इंसान तब तक सलामत है, जब तक वो परिवार से जुड़ा है। क्योंकि परिवार से अलग होकर आजादी तो मिल जाती है लेकिन संस्कार चले जाते हैं। 🌿

जन्म होने पर बटने वाली मिठाई से शुरू हुआ ज़िन्दगी का यह खेल, श्राद्ध की खीर पर आकर खत्म हो जाता है.. यही जीवन की मिठास है। लेकिन बड़े दुर्भाग्य की बात है कि बंदा इन दोनों मौको पर ये दोनों चीजे नही खा पाता। 🌿