Chanakya Niti Chapter 11 in Hindi + English

Chanakya Niti में अध्याय 11 हमें सिखाता है कि सच्चे गुण और ज्ञान जन्मजात होते हैं। उदारता, विवेक, साहस और मधुर वचन जीवन को सफल और संतुलित बनाते हैं।

यह अध्याय बताता है कि लोभ, अहंकार और इन्द्रियों की तृष्णा व्यक्ति को नीच और असम्मानित बनाती हैं, जबकि दान, संयम और धर्मपरायणता सम्मान और शक्ति दिलाते हैं। यहाँ हम सीखते हैं कि सही आचरण, ज्ञान और सद्गुणों से जीवन में स्थायी मूल्य और समाज में सम्मान पाया जा सकता है।

चाणक्य नीति क्या है?

About Chanakya
Chanakya (c. 375–283 BCE) यानी Acharya Vishnugupta / Kautilya, नंद वंश के पतन और चंद्रगुप्त मौर्य के उदय के पीछे का master strategist, महान राजनेता, शिक्षक और अर्थशास्त्री थे। उनकी नीतियाँ सिर्फ़ राजनीति में ही नहीं, बल्कि जीवन, संबंध, व्यापार और सफलता के हर क्षेत्र में मार्गदर्शन करती हैं।

वे Takshashila University में आचार्य थे और उन्होंने Arthashastra तथा Chanakya Niti लिखी।

उनकी नीतियों का मुख्य उद्देश्य था —

  • राजनीति, अर्थव्यवस्था और जीवन में सफलता पाना
  • समाज और राज्य की स्थिरता
  • व्यक्ति के चरित्र और निर्णय क्षमता को मजबूत करना!!

Chanakya Niti Chapter 11 | चाणक्य नीति : ग्यारहवाँ अध्याय

#1

उदारता, वचनों में मधुरता, साहस, और आचरण में विवेक — ये बातें कोई पा नहीं सकता, ये जन्मजात गुण होते हैं।

Generosity, sweet speech, courage, and wisdom in conduct are not learned — they are innate qualities.

#2

जो अपने समाज को छोड़कर दूसरे समाज में जा मिलता है, वह उसी राजा की तरह नष्ट हो जाता है जो अधर्म के मार्ग पर चलता है।

He who abandons his own community and joins another perishes, just like a king who walks the path of unrighteousness.

#3

हाथी का शरीर कितना विशाल है, लेकिन वह एक छोटे से अंकुश से नियंत्रित हो जाता है।
एक दीपक घने अंधकार को दूर कर देता है — क्या दीपक अंधकार से बड़ा है?
एक बिजली पर्वत को तोड़ देती है — क्या बिजली पर्वत जितनी विशाल है?
नहीं, बिल्कुल नहीं। वही बड़ा है जिसकी शक्ति प्रभावी होती है, आकार का कोई महत्व नहीं।

An elephant, though huge, is controlled by a small goad.
A lamp drives away deep darkness — is the lamp greater than darkness?
Lightning shatters mountains — is lightning as large as the mountain?
No. True greatness lies in effective power, not in size.

#4

जो व्यक्ति गृहस्थी के कार्यों में अत्यधिक लिप्त रहता है, वह कभी ज्ञान प्राप्त नहीं कर सकता।
मांस खाने वाले के हृदय में दया नहीं हो सकती।
लोभी व्यक्ति कभी सत्य भाषण नहीं कर सकता।
और शिकारी में कभी पवित्रता नहीं हो सकती।

One who is deeply absorbed in household affairs never gains true knowledge.
Compassion cannot exist in a meat-eater’s heart.
A greedy man cannot speak truthfully.
And a hunter can never be pure.

#5

एक दुष्ट व्यक्ति में कभी पवित्रता उत्पन्न नहीं हो सकती, चाहे उसे कितनी भी शिक्षा दी जाए।
जैसे नीम का पेड़ कभी मीठा नहीं हो सकता, भले ही उसकी जड़ से शिखर तक घी और शक्कर डाली जाए।

A wicked person can never become pure, no matter how much he is taught —
just as a neem tree can never become sweet, even if sprinkled with ghee and sugar from root to tip.

#6

आप चाहे सौ बार पवित्र जल में स्नान करें, आप अपने मन का मैल नहीं धो सकते।
जैसे मदिरा का पात्र पवित्र नहीं हो सकता, चाहे उसे गर्म करके सारी मदिरा की भाप बना दी जाए।

Even a hundred sacred baths cannot cleanse the dirt of the mind,
just as a wine pot cannot be purified by burning away all the wine inside it.

#7

यह कोई आश्चर्य की बात नहीं है कि व्यक्ति उन चीज़ों को तुच्छ समझता है जिनका उसे ज्ञान नहीं होता।
जैसे एक जंगली शिकारी की पत्नी हाथी के मस्तक का मणि फेंक देती है और गूंजे की माला पहन लेती है।

It is no surprise when a man mocks what he does not understand —
like a hunter’s wife who throws away the gem from an elephant’s head and wears a cheap seed necklace instead.

#8

जो व्यक्ति एक वर्ष तक भोजन करते समय भगवान का ध्यान करता है और मौन रहता है, उसे एक हजार करोड़ वर्षों तक स्वर्गलोक की प्राप्ति होती है।

He who eats in silence for one full year, meditating on God with every meal, earns a place in heaven for a thousand crore years.

#9

एक विद्यार्थी को पूर्ण रूप से निम्नलिखित बातों का त्याग करना चाहिए —
(१) काम, (२) क्रोध, (३) लोभ, (४) स्वादिष्ट भोजन की इच्छा,
(५) शरीर का श्रृंगार, (६) अत्यधिक जिज्ञासा, (७) अधिक नींद, और (८) शरीर निर्वाह के लिए अत्यधिक प्रयास।

A true student should give up these eight things:
lust, anger, greed, craving for tasty food, body decoration, excessive curiosity, too much sleep, and overworking for material needs.

#10

वही सच्चा ब्राह्मण है जो एक बार के भोजन से संतुष्ट रहता है, जिस पर सोलह संस्कार हुए हों, और जो अपनी पत्नी के साथ महीने में केवल एक बार — मासिक धर्म समाप्त होने के दूसरे दिन — ही संबंध रखता है।

He alone is a true Brahmin who is content with one meal a day, has undergone sixteen sacred rites, and cohabits with his wife only once a month — on an auspicious day after her menses.

#11

वह ब्राह्मण जो व्यापार में लगा रहता है, वास्तव में वैश्य कहलाता है।

A Brahmin who engages in trade is, in truth, a Vaishya.

#12

वह व्यवसाय जो निम्न स्तर के लोगों से जुड़ा हो, ब्राह्मण को शूद्र बना देता है।

Any trade that involves association with the low-minded turns a Brahmin into a Shudra.

#13

वह ब्राह्मण जो दूसरों के कार्यों में बाधा डालता है, जो दंभी, स्वार्थी और कपटी है, जो मुँह में मिठास और हृदय में क्रूरता रखता है — वह बिल्ली के समान है।

A Brahmin who obstructs others’ work, is proud, selfish, deceitful, and speaks sweetly while harboring cruelty in his heart — is like a cat.

#14

वह ब्राह्मण जो तालाब, कुआँ, बगीचा और मंदिर को नष्ट करता है, वह मलेच्छ कहलाता है।

A Brahmin who destroys ponds, wells, gardens, or temples is called a maleccha (impure person).

#15

वह ब्राह्मण जो भगवान या गुरु की संपत्ति चुराता है, दूसरों की पत्नी से संबंध रखता है, और जो जीविका के लिए कुछ भी खा लेता है — वह चांडाल कहलाता है।

A Brahmin who steals the wealth of God or his guru, consorts with another’s wife, or eats anything for survival — is called a Chandala (outcast).

#16

गुणी व्यक्ति को अपनी आवश्यकता से अधिक वस्तुएँ दान में दे देनी चाहिए। दान के कारण ही कर्ण, बली और राजा विक्रमादित्य आज तक प्रसिद्ध हैं। देखो उन मधुमक्खियों को — जो अपने पैर दुख से पटक रही हैं, कह रही हैं, “हमने न तो अपना शहद खुद खाया, न दान दिया, और अब एक पल में सब कोई छीनकर ले गया।”

A virtuous person should donate everything beyond his needs. It is through charity that Karna, Bali, and King Vikramaditya are remembered even today. Look at the honeybees — striking their feet in sorrow, saying, “We neither enjoyed our stored honey nor gave it away, and now someone has taken it all in an instant.

”सारांश | Summary

अध्याय 11 में चाणक्य हमें सिखाते हैं कि:

  • सच्चे गुण जन्मजात होते हैं — उदारता, मधुर वचन, साहस और विवेक सीखने या दिखावे से नहीं आते।
  • लोभ, क्रोध और अहंकार व्यक्ति को नीच बनाते हैं और समाज में उसका सम्मान घटाते हैं।
  • सही जीवन आचरण और संयम से बनता है — ज्ञान, दया और धर्मपरायणता ही असली ताकत हैं।
  • पर्याप्तता और दान जीवन में स्थायी सुख और समाज में सम्मान दिलाते हैं।
  • सद्गुण और विवेक ही व्यक्ति को वास्तविक ब्राह्मण और आदर्श मानव बनाते हैं।

संक्षेप में, अध्याय 11 हमें समझाता है कि जीवन में सच्ची शक्ति और सम्मान गुणों, संयम और दान में निहित हैं, न कि केवल धन या पद में।

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